विष्णु के 10 मुख्य अवतार (दशावतार):–राम अवतार (मर्यादा पुरुषोत्तम) भाग -7
जी हाँ, आपने बिल्कुल सही कहा। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम (मर्यादा पुरुषोत्तम), का मुख्य उद्देश्य त्रेतायुग में अत्याचारी रावण का वध करके धर्म की पुनः स्थापना करना और मानवता को सही मार्ग दिखाना था
राम अवतार के प्रमुख उद्देश्य:
- धर्म की स्थापना: अधर्म और अन्याय के प्रतीक रावण का अंत कर, समाज में धर्म, नीति और सदाचार को पुनर्स्थापित करना
- मर्यादा का पालन: एक आदर्श पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में मर्यादाओं का पालन करते हुए मनुष्य के लिए सर्वोच्च आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करना
- दुष्टों का विनाश: रावण और उसकी राक्षस सेना का नाश करना, जो ऋषियों और देवताओं को प्रताड़ित कर रहे थे
श्री राम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम‘ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी धर्म, सत्य और मर्यादा का मार्ग कभी नहीं छोड़ा।
मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मुख्य आदर्श:
- आज्ञाकारी पुत्र: पिता के वचन को निभाने के लिए सहर्ष 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया।
- आदर्श आचरण: जीवन में कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखा।
- न्यायप्रिय राजा: रामराज्य को आदर्श सुराज का प्रतीक माना जाता है, जहाँ प्रजा सुखी और सुरक्षित थी।
- सद्गुणों के भंडार: वे सत्य, दया, करुणा और धर्म के प्रतीक हैं
राम अवतार की कहानी हमें कठिन समय में भी धैर्य, त्याग और नैतिक मूल्यों का पालन करना सिखाती है।

