संविधान सुरक्षा महारैली में गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की उठी आवाज
रंगलाल हाई स्कूल मैदान, शेरघाटी में आयोजित संविधान सुरक्षा महारैली में महिला जागृति फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्षा गीता पैट्रिक ने अपने संबोधन में गरीबों, भूमिहीनों और मजदूरों के अधिकारों को लेकर जोरदार आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि बिहार में आज भी लाखों परिवार ऐसे हैं, जिनके पास न अपना घर है और न ही जमीन। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह संविधान द्वारा दिए गए बराबरी के अधिकार के अनुरूप है। उन्होंने मांग की कि आवास विहीन और भूमिहीन गरीबों को पाँच डीसमिल जमीन देने वाले कानून को पुनः प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि हर गरीब परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन मिल सके।
गीता पैट्रिक ने कहा कि जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि पहचान, सुरक्षा और भविष्य का आधार है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गरीबों की आवाज नहीं सुनी गई, तो यह आंदोलन व्यापक रूप लेगा।
महारैली में उन्होंने नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) का भी विरोध किया। उनके अनुसार, इन कानूनों के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है, काम के घंटे बढ़ाए जा रहे हैं और नौकरी की सुरक्षा घटाई जा रही है। उन्होंने मांग की कि नए लेबर कोड को रद्द कर पुराने श्रम कानूनों को पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि मजदूरों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना उनका हक है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सामाजिक न्याय, मजदूर अधिकार और गरीबों को जमीन दिलाने के संकल्प के साथ एकजुटता दिखाई।
महारैली में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और “मजदूर एकता जिंदाबाद” तथा “जय संविधान” के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
