गया में संविधान सुरक्षा महारैली, भूमिहीनों को जमीन और लेबर कोड के विरोध में उठी आवाज

संविधान सुरक्षा महारैली का आयोजन शुक्रवार को शेरघाटी के रंगलाल हाई स्कूल मैदान में किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन मा. सज्जाद नोमानी ने किया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सतीश दास उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. विलास खरात ने की।
रैली को संबोधित करते हुए महिला जागृति फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्षा गीता पैट्रिक ने भूमिहीन और आवास विहीन गरीबों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार में आज भी लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके पास न तो अपना घर है और न ही जमीन। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय का गंभीर विषय बताते हुए सवाल किया कि क्या यह संविधान की भावना के अनुरूप है।
गीता पैट्रिक ने कहा कि पूर्व में एक कानून के तहत भूमिहीन गरीबों को पांच डीसमिल जमीन देने का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस कानून को फिर से पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाए और हर गरीब परिवार को जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के जरिए मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है, काम के घंटे बढ़ाए जा रहे हैं और नौकरी की सुरक्षा कम की जा रही है। उन्होंने सरकार से नए लेबर कोड को रद्द कर पुराने श्रम कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गरीबों और मजदूरों की आवाज नहीं सुनी गई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा और पूरे देश में फैल जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में सामाजिक न्याय, भूमिहीनों को जमीन और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया। रैली के दौरान “मजदूर एकता जिंदाबाद” और “जय संविधान” के नारे गूंजते रहे।